नए 8th Pay Commission की ToR (Terms of Reference) में पेंशनर्स के शामिल न होने को लेकर विवाद सामने आया है। जानिए क्या कहा गया है और कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए इसका क्या मतलब होगा।
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📢 बेहद अहम अपडेट — पेंशनर्स और 8वें वेतन आयोग
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। हाल ही में जारी ToR के अनुसार, नए 8वें वेतन आयोग की रूपरेखा में लगभग 69 लाख पेंशनर्स को शामिल नहीं करने का आरोप दर्ज हुआ है।
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🧾 मुख्य तथ्य और विवाद
सरकार ने 3 नवम्बर 2025 को 8वें वेतन आयोग के ToR को अधिसूचित किया।
लेकिन टर्म्स ऑफ रेफरेंस में पेंशनर्स को लेकर स्पष्ट उल्लेख नहीं है — जिससे पेंशनधारकों में चिंता बनी है।
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि इस मामले में जल्द स्पष्टीकरण आना चाहिए, ताकि वेतन-भत्ते, पेंशन और भविष्य के लाभों पर स्पष्टता मिले।
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🔍 पेंशनर्स क्यों चिंतित हैं?
पेंशनर्स का मुख्य सवाल यह है कि यदि आयोग में उनका नाम न हो, तो भविष्य में वेतन आयोग की सिफारिशों और महंगाई भत्ते (DA/DR) में उन्हें कितना लाभ मिलेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर पेंशनर्स को पूरी तरह शामिल किया गया, तो वेतन वृद्धि व पेंशन सुधार का दायरा 30 % से ऊपर जा सकता है।
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🕒 आगे क्या होगा?
आयोग को अपनी रिपोर्ट 18 महीनों में सौंपने का लक्ष्य मिला है — यानी अप्रैल 2027 तक।
अगले कुछ हफ्तों में सरकार द्वारा पेंशनर्स-पेरोलिंग और भत्तों पर स्पष्ट निर्देश जारी होने की संभावना है।
कर्मचारी-यूनियनों, पेंशन सूर्यागणों और सामाजिक-संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर दबाव बनाए रखना शामिल है।
