8वें वेतन आयोग के ToR में बड़ा बदलाव की मांग — 20% इंटरिम रिलीफ व पेंशनर्स को शामिल करने की याचिका

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स ने 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में सुधार और 20% इंटरिम रिलीफ देने की मांग की है। जानिए क्या बदलाव हो सकते हैं।




📢 मांग-लाइनें और पेंशनर्स की आवाज़

केंद्रीय कर्मचारियों के प्रमुख संगठन — Confederation of Central Government Employees & Workers ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र जिसमें उन्होंने 8वें वेतन आयोग के ToR में पेंशनर्स व पारिवारिक पेंशनधारकों को स्पष्ट रूप से शामिल किए जाने की मांग की है।
साथ ही, उन्होंने 20% इंटरिम रिलीफ तुरंत देने की भी मांग की है ताकि बढ़ती महंगाई के प्रभाव और वेतन समीक्षा में देरी से राहत मिल सके।




🧾 कौन-कौन से बदलाव की मांग?

1. इम्प्लीमेंटेशन की तारीख – ToR में स्पष्ट रूप से 01 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की व्यवस्था होनी चाहिए।


2. पेंशन व पारिवारिक पेंशनधारक – उन्होंने कहा है कि पुराने पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स को भी आयोग के दायरे में लाया जाए।


3. “अनफंडेड कॉस्ट” शब्दावली हटानी चाहिए – ToR में इस्तेमाल ‘unfunded cost of non-contributory pension schemes’ जैसी शब्दावली को हटाकर पेंशन को एक संवैधानिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए।


4. इंटरिम रिलीफ तुरंत दिया जाए – देरी के कारण कई कर्मचारियों और पेंशनर्स की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है, इसलिए 20% तक का तुरंत रिलीफ मांगा गया है।






🔍 क्या इसका असर होगा?

अगर ToR में ये बदलाव शामिल होते हैं, तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अधिक व्यापक और लाभ-प्रद होंगी।

पेंशनर्स को लाभ मिलेगा — विशेष रूप से पुरानी पेंशन योजना (OPS) अन्तर्गत आने वाले या NPS/UPS में शामिल कर्मचारियों को।

इंटरिम रिलीफ मिलने से तत्काल आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है, जबकि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है।

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