कर्मचारी-संघों ने 8वें वेतन आयोग के टर्म्स-ऑफ-रेफरेंस (ToR) में पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनधारकों को शामिल करने की मांग की है। जानिए क्या हैं प्रमुख बिंदु।
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📢 क्या हुआ है नया?
केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स के मुख्य संगठन ने प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को पत्र लिखकर लगभग 69 लाख पेंशनर्स व पारिवारिक पेंशनधारकों को 8वें वेतन आयोग की परिधि में शामिल करने की मांग की है।
उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन-रिवीजन संबंधी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
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🧾 संघों की प्रमुख मांगें
ToR में Application date अर्थात प्रभावी तिथि का उल्लेख हो — कर्मचारियों का कहना है कि इसे 1 जनवरी 2026 माना जाना चाहिए।
26 लाख से अधिक कर्मचारियों को, जो Old Pension Scheme (OPS) के अंतर्गत नहीं थे, उन्हें इस आयोग में शामिल किया जाए।
“Unfunded cost of non-contributory pension schemes” जैसे शब्द हटाए जाएँ क्योंकि ये पेंशनर्स के हित में नहीं माने जा रहे।
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🔍 कर्मचारियों-पेंशनर्स को क्या फायदा हो सकता है?
यदि पेंशनर्स को शामिल किया जाता है, तो वेतन-सुधार के साथ उनके पेंशन लाभ भी बढ़ सकते हैं।
आयोग की सिफारिशें अधिक व्यापक होंगी और सेवा-कृत कर्मियों-रिटायरियों को बराबरी का मौका मिलेगा।
पेंशन आदि की रिवीजन प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी, जिससे लंबे समय से असमंजस में कर्मचारी राहत पाएँगे।
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🧠 निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग की दिशा में यह एक बहुत महत्वपूर्ण मोड़ है।
कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की सक्रिय आवाज़ सरकार को निर्णायक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
अगर सरकार इन मांगों को ध्यान में रखती है, तो आने वाला समय कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
